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Sunday, November 14, 2010

सोम रस


श्रंगार रस , वीर रस , वीभत्स रस हास्य रस आदि रस मनुस्यो के मुख से उत्पन्न होते है एवं मनुष्यो के कानो द्वारा पिये जाते है और इनके पभाव भी अवश्य ही होते है वैसे ही वेद मे एक रस है जो देव पीते है उसे सोम रस कहा जाता है।
सोम रस वनानें की विधि पत्थर का खल और पत्थर का ही मूसल लीजियै मूसल को खल मे तल से ऊपर लटकता हुआ पहली दो अगुलियों एवं अंगूठे से मूसल का ऊपरी अंन्तिम सिरा पकड़े ,अब इस मूसल को मूसल के ऊपरी अन्तिम हिस्से को केन्द्र मे रखते हुये नीचे के हिस्से को इस प्रकार वृत्र गति दे कि मूसल खल के अन्दरूनी हिस्से मे लगातार स्वासतिक कृम से गतिमान हो , तव इसमे से जो ध्वनि उत्पन्न होती है यही सोम रस होता है ।